मेरा क्या है

हज़रत इब्न ए मसूद रदिअल्लाहु अन्हु से रिवायत है की रसूल सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने फरमाया तुम में से कौन है जिसे अपने वारिस का माल अपने माल से ज्यादा प्यारा हो?

सहाबा ने कहा ” ऐ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ! हम में से हर शख्स को अपना माल ही सबसे ज्यादा प्यारा है।

आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया ” तो इंसान का माल तो वही है जो उसने ( सदक़ा और ख़ैरात) करके आगे भेजा और उसके वारिस का माल वो है जो वो पीछे छोड़ गया” ।

(हदीस)

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🕸🕸🕸जो हम सदक़ा कर देते हैं वो तो हमारे हमेशा की ज़िन्दगी के लिए अल्लाह के पास जमा हो जाता है safe हो जाता है। उसका बदला जो उस दिए हुए माल से बहुत बहुत ज्यादा होता है वो तो हमे मिल कर रहेगा। बाकी सब जो हम छोड़ जाते हैं वो तो दूसरे लोग ही खर्च करते हैं। वो हमारा होता ही नहीं है।🕸🕸🕸

बाप और बेटा

🌾☘🌾☘🌾एक बार एक आदमी नबी सल्लल्लाहु अलैहिवासल्लम के पास आया और अपने बाप की शिकायत करने लगा के वो जब चाहते हैं मेरे माल ले लेते हैं।आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने उस आदमी के बाप को बुलाया तो एक बूढ़ा कमज़ोर आदमी लाठी टेकता हुआ आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के पास हाज़िर हुआ। आप सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने उस बूढ़े से पूछा तो उसने कहना शुरू किया ऐ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम एक जमाना था कि ये कमज़ोर और बेबस था और मुझ मे ताक़त थी। मैं मालदार था और ये खाली हाथ। मैंने कभी इसको अपनी चीज़ लेने से नहीं रोका। आज मैं कमज़ोर हुँ और ये तंदरुस्त और ताकतवर है । मैं खाली हाथ हूँ और ये मालदार है। अब ये अपना माल मुझसे बचा बचा के रखता है। बूढ़े की बातें सुनकर रहमते दो आलम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम रो पड़े और फरमाया ” तू और तेरा माल तेरे बाप का है।।🌾☘🌾☘🌾

3 दुआ

♦♦रसूल सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया के तीन दुआएं ज़रूर क़ुबूल की जाती हैं और उनकी कुबूलियत में कोई शक़ नही…

1. बाप की औलाद के लिए

2. मुसाफिर की दुआ

3. मज़लूम ( जिस पर ज़ुल्म हुआ हो) की दुआ

(अबू दाऊद)♦♦

साया

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया की सात आदमी हैं जिनको अल्लाह तआला उस दिन अपने साये में जगह देगा जिस दिन उस के साए के अलावा कोई साया ना होगा।

1. इन्साफ करने वाला हुक्मरान (ruler)

2. वो नौजवान जो अल्लाह की इबादत में पल कर परवान चढ़ा हो।

3. वो आदमी जिसका दिल मस्जिद में अटका हुआ हो।

4. वो दो आदमी जो अल्लाह की रज़ा की ख़ातिर एक दूसरे से मुहब्बत करते हैं, इसी वजह से बाहम जमा होते हैं और इसी पर एक दूसरे से जुदा होते हैं।

5. वो आदमी जिसको मंसब( status) और जमाल (beauty) वाली औरत गुनाह की दावत दे, और वो उसके जवाब में कह दे ,मैं तो अल्लाह से डरता हूँ।

6. वो आदमी, जिसने इस तरह छुपा के सदक़ा किया कि उसके बायें हाथ को भी ये इल्म ना हुआ( पता ना चला) कि उसके दायें हाथ ने क्या खर्च किया।

7. वो आदमी जिसने तन्हाई में अल्लाह को याद किया और उसकी आँखों से ( उसके खौफ से) आंसू बहने लगे।

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ख़ास 70000


इब्न अब्बास से रिवायत है मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया के “मेरे सामने बहुत सी उम्मतें पेश की गईं। मैंने देखा की किसी नबी के साथ तो बहुत बड़ी जमात है और किसी के साथ एक दो आदमी हैं। और मैंने एक नबी ऐसा भी देखा जिसके साथ कोई एक भी नही था। फिर मुझे एक बड़ी जमात दिखाई गयी, मैंने समझा के ये मेरी उम्मत है लेकिन मुझसे कहा गया के ये हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम और उनकी उम्मत है। फिर मैंने एक और बहुत बड़ी जमात देखी, मुझे बताया गया कि ये आप की उम्मत है। और इन में 70000 लोग ऐसे हैं जो बगैर हिसाब और बगैर अज़ाब के जन्नत में दाखिल होंगे। इतनी बात फरमाने के बाद हज़रत सल्लाहुअलैहि वसल्लम उठे और घर तशरीफ़ ले गए । सहाबा कराम उन (70000 खुशनसीब) लोगो के बारे मे बात करने लगे। बाज़ ने कहा” शायद ये वो लोग हैं जो मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सोहबत से फैज़याब हुए और कुछ लोगो ने कहा शायद ये वो लोग हैं जो इस्लाम में पैदा हुए और उन्होंने अल्लाह के साथ किसी को शरीक नही ठहराया। इस के अलावा उन्होंने कुछ और बातें भी कहीं। इतने में मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तशरीफ़ ले आये तो सहाबा ने आपको अपनी राय बताई तो आप ने फ़रमाया ” ये वो लोग हैं जो न दम करवाते हैं न ( इलाज़ की गरज से) अपने जिस्म दग्वाते हैं। न बादशगुनी लेते हैं और वो सिर्फ अपने रब पर ही तवक़्क़ुल ( भरोसा) करते हैं । ये सुन कर उकाशा बिन महसन खड़े हुए और अर्ज़ की ऐ अल्लाह के रसूल ये दुआ कीजिये की अल्लाह तआला मुझे उन में से कर दे। आप ने कहा ” तू उन में से है। इसके बाद एक दूसरा शख्स खड़ा हुआ और कहा”ऐ अल्लाह के रसूल मेरे लिए भी ये दुआ कीजिये की अल्लाह तआला मुझे भी उन में से कर दे। आप ने कहा इस ( दुआ) में उकाशा तुम पर सबक़त ले गए (आगे बढ़ गए)।

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मैं उन ख़ास 70000 लोगो के बारे में सोच रही थी। वैसे लोग कितने कम होंगे दुनिया में। 1400 साल से अब तक और आगे क़यामत तक सिर्फ 70000लोग। वो भी पहले के वक़्त में ज्यादा नेक लोग गुज़र चुके। इस वक़्त ऐसे लोग 100 भी हो पूरी दुनिया में तो बहुत मुश्किल है। तो ज्यादा मुमकिन यही है कि हम अपनी ज़िंदगी में ऐसे किसी इंसान से नही मिले होंगे। तो मैं imagine कर रही थी कि किस तरह की personality के लोग हैं ये। इनकी आदतें इनके शौक क्या होते होंगे। आज की दुनिया में ये किस तरह जीते है क्या करते हैं। किन हालात में कैसे react करते हैं।

ये लोग आम लोगो की तुलना में अल्लाह पर ज्यादा तवक़्क़ुल (भरोसा) करते हैं।ये लोग न दम ( रुकया) करवाते हैं न ( इलाज़ की गरज से) अपने जिस्म दग्वाते हैं। हालाँकि इन दोनों में कोई गुनाह नही था। इससे पता चलता है वो ऐसे लोग हैं जो सिर्फ हलाल और हराम की लिस्ट बना कर काम नही करते। वो बात बात पर ये नही पूछते के ये कबीरा गुनाह है या सगीरा। वो फ़तवा की राह पे नही चलते बल्कि तक़वा की राह पर चलते हैं।

रुकया करवाने की इज़ाज़त है दीन में फिर ये कीसी से रूकिया क्यों नही करवाते । क्योंकि ये लोग किसी से कुछ नही मांगते ,रूकिया भी नही मांगते। इन्हें सिर्फ अल्लाह से मांगने की आदत है। अपनी ज़रूरतों के लिए सिर्फ अल्लाह ही के आगे हाथ फैलाते हैं।

जैसा की दुनिया के हर आदमी पर कोई ना कोई तक़लीफ़ बीमारी मुसीबत आती ही रहती है । इन लोगो पर भी आती है। इनकी भी आज़माइश होती है। पर ये लोग अपने तौहीद पर पक्के होते हैं। ये जानते हैं कि हर भलाई और बुराई अल्लाह ही की तरफ से होती है। इसलिए किसी शगुन या बदशगुन को नही मानते। और पूरे confidence से अपना काम करते हैं। जो लोग शगुन और बादशगुन को मानते हैं यक़ीन करते हैं उनकी ज़िन्दगियों में एक अनजाना सा डर रहता है एक बेचैनी सी रहती है। कई साल पहले बचपन में मुझे इन बातों पर यकीन था। मुझे नहीं पता था कि ये ग़लत है बेवक़ूफ़ी है । मुझे मेरी एक दोस्त ने बताया था कि दक्षिण (south) की तरफ मुंह कर के खाना खाने से घर में कोई मर जाता है। जिसने मुझे बताया था ये बात उसके uncle(चाचा )की अभी अभी accident से मौत हुई थी। और उसने ये भी कहा था कि इससे पहले वो लोग भी दक्षिण तरफ मुंह कर के खाते थे।मैं उस वक़्त 5th class में थी मुझे उसकी बातों पर यक़ीन हो गया। और मैंने south की ओर मुंह कर के खाना छोड़ दिया पर अपने घर वालों को नही रोक पाई। वो पहले की तरह किसी भी direction में घूम कर खाते थे। उन्हें देख कर मुझे इतनी घबड़ाहट होती थी डर लगता था जैसे अभी कुछ होने वाला हो। क़रीब क़रीब उसी वक़्त एक दूसरी दोस्त ने बताया था कि बैठ कर पैर हिलाने से parents के पैसे खर्च होते हैं। इस बात पर यकीन कर के भी मैंने अपने लिए बहूत मुश्किल खड़ी कर ली क्योंकि ये मेरी आदत थी और इसे छोड़ना मुश्किल था। मैं हर बार ऐसा करती और फिर guilt होता कि मैने कितने पैसे खर्च कर दिए। और भी बहुत सी इस तरह की बातों पर मेरा belief था। कई साल बादशगुनी पर यकीन कर के मेरी समझ में आ गया है कि ये एक क़ैद की तरह है और इन पर यक़ीन करना छोड़ना एक आज़ादी की तरह महसूस होता है।हमे एक list बनानी चाहये के हमारे beliefs में कौन कौन सी बातें irrational हैं उन्हें छोड़ देना चाहये। क्योंकि अन्धविश्वास तौहीद को कमज़ोर कर देता है।

इसी तरह ये खास 70000 लोगों में एक ख़ूबी ये भी है कि ये अल्लाह के फैसलों को ख़ुशी ख़ुशी क़ुबूल करते हैं। वो अपनी मर्ज़ी को अल्लाह की मर्ज़ी से ऊपर नही करते। वो अल्लाह की मर्ज़ी को ही अपनी मर्ज़ी बना लेते हैं और उसको बदलने की कोशिश नही करते रहते। इसीलिए वो दाग कर इलाज़ नही करवाते न रुकया करवाते, और बादशगुनी को नही मानते। वो अल्लाह के फैसलों को क़ुबूल कर के अपने काम में लग जाते हैं। और अल्लाह को राज़ी करने वाले खुश करने वाले काम करते रहते हैं। इन्हें अल्लाह के फैसलों पर शक नही होता। ये उम्मत के सबसे ज्यादा तावक़्क़ुल करने वाले लोग होते हैं। यही इनकी सबसे बड़ी खूबी है।

दुनिया की कोई भी ख़ूबी खुद ब खुद नही आ जाती सीखना पड़ता है। तो तवक़्क़ुल बिना सीखे बिना खुद कोशिश किये कैसे आ सकता है। किसी में तवक़्क़ुल पैदाइशी नही होता। उसे कोशिश कर के सीखा जाता है। अल्लाह हमे तौफ़ीक़ दे हमें तवक़्क़ुल दे।

हलाल या हराम

🌱नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया के लोगो पर एक ऐसा ज़माना आएगा (एक ऐसा वक़्त आयेगा) के इंसान कोई परवाह नही करेगा के जो उसने हासिल किया है वो हलाल से है या हराम से ।🌱

माल

🌵क़ाब बिन एयास कहते हैं कि मैंने नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम को फरमाते सुना के हर उम्मत का एक फितना है और मेरी उम्मत का फ़ितना माल है।🌵