ज़िक़्र के कुछ फ़ायदे

वैसे तो ज़िक़्र के बहुत से फ़ायदे हैं पर मै यहाँ कुछ लिख रही हूँ।

* अल्लाह खुश होते हैं।
* अल्लाह त’आला भी उसे याद करते हैं। जैसा कि क़ुरआन में है
ﻓَﺎﺫْﻛُﺮُﻭﻧِﻲ ﺃَﺫْﻛُﺮْﻛُﻢْ
(तुम मुझे याद करो मैं तुम्हें याद करूँगा)

* ये ज़बान की हिफाज़त करता है और झूठ , ग़ीबत , चुग़ली, गालीयोँ, बेकार की बातों से बचाता है। जब इंसान का दिल और ज़बान ज़िक्र में व्यस्त रहता है तो वो बेकार की फ़ुज़ूल बातों से बच जाता है।
* ज़िक्र करने से बेकार के ख़्याल और चिंता दूर होती है।
* शैतान दूर रहता है।
* शैतान कमज़ोर हो जाता है।
* ज़िक़्र दिलों को ज़िंदा करता है। इब्न तैमिय्या कहते हैं कि ज़िक़्र दिल के लिए उतना ही ज़रूरी है जितना कि मछली के लिए पानी ज़रूरी होता है।
* ज़िक़्र से जन्नत में पेड़ उगाये जाते हैं।
* ज़िक़्र करते रहने से बन्दा अल्लाह के करीब होता है।
* दिल में अल्लाह की मुहब्बत आती है।
* ज़िक़्र की मज़लिस (gatherings) फरिश्तों की मज़लिस होती है।
* दिल में खुशी और सकारात्मकता आती है।
* ज़िक़्र करते रहने से शुक्र और सब्र आसान हो जाता है।

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